पटना। बिहार के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता नितिश कुमार ने मंगलवार सुबह अपना सांविधिक सदस्यता हस्तांतरण पूरा किया है। ३१ मार्च २०२६ को उन्होंने बिहार विधान परिषद के सदस्य पद से इस्तीफा जमा कर दिया, जो राज्यसभा में चुने जाने के बाद कानूनी तौर पर अनिवार्य था। यह मोड़ बिहार की राजनीति के लिए काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि अब सवाल यह है कि क्या वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे या नहीं।
राज्यसभा जीत और आठ दिन का खेल
बात दरअसल १६ मार्च २०२६ से शुरू हुई थी जब नितिश कुमार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नाई को राज्यसभा के लिए चुना गया था। भारतीय संविधान की धारा ११४ के मुताबिक एक साथ दो लोकप्रिय प्रतिनिधि होने की अनुमति नहीं है। इसलिए जिधर १४ दिनों का समय दिया गया था, उसका अंत ३० मार्च २०२६ को होना था।
हालाँकि, प्रक्रिया में कुछ देरी हुई और इस्तीफे का औपचारिक कार्यालय में दर्ज होने का कार्य मंगलवार सुबह तक टाला गया। इस काम को पूरा करने के लिए नितिश कुमार के करीबी सहयोगी विजय कुमार चौधरी ने पत्र बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को सौंपा।
कानूनी गुमटिका: क्या वे सीएम हैं?
ये रिटायरमेंट बहुत बड़ी घटना है, लेकिन असली कहानी अभी बाकी है। कई लोग सोच रहे थे कि इस्तीफे के साथ ही सीएम का पद भी खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। नितिश कुमार के पास संविधान से मिली छह महीने की रियायत है। इसका मतलब सरल शब्दों में यह है कि जब तक वह विधानसभा या विधान परिषद में नहीं होते, तब तक भी वे सरकार चला सकते हैं, बशर्ते छह महीने बीतें नहीं।
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सूत्रों का कहना है कि अभी किसी निर्णय पर पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन प्रेम कुमार, जो बिहार विधानसभा के सभापति हैं, ने स्पष्ट किया कि १४ दिन का नियम सिर्फ सदस्यता के लिए था। मुख्यमंत्री पद से हटने का कोई स्वचालित नियम नहीं है।
राज्यसभा शपथ और अगला कदम
इस पूरी गोलमाल के बीच, सबसे आसन्न कार्यक्रम १० अप्रैल २०२६ की शपथ ग्रहण समारोह है। यह भारत का एक महत्वपूर्ण संस्थागत क्षण होगा जहाँ नए सदस्य अपनी जिम्मेदारी लेते हैं। नितिन नावाई भी इसमें शामिल हैं, जिन्हें बीजेपी ने इस पद पर भेजा है।
इसके पीछे की रणनीति को देखते हुए लगता है कि बिहार के नेतृत्व में बदलाव आ सकता है, या फिर नितिश कुमार का ध्यान केंद्र पर ज्यादा बढ़ रहा है। पिछले शुक्रवार को उनकी 'समृद्धि यात्रा' पटना के बापू सभाघर में खत्म हुई थी, जो इससे पहले की योजनाओं का हिस्सा था।
Frequently Asked Questions
नितिश कुमार मुख्यमंत्री का पद क्यों नहीं छोड़ रहे?
संविधान की अनुच्छेद १६४ के तहत राज्य के मुख्यमंत्री को छह महीने की छूट दी जाती है यदि वे विधानमंडल का सदस्य नहीं हैं। उन्हें सदस्य बनने के लिए ६ महीने का समय मिलता है।
इसलिए इन्होंने राज्यसभा का रास्ता क्यों चुना?
राज्यसभा में बैठकर उनका दूरदर्शी नेतृत्व केंद्र में अधिक प्रभाव डाल सकता है। कई बार राज्यों के सीएम उच्च सदन में जाते हैं ताकि वो राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने में योगदान दे सकें।
नई शपथ किस तारीख को लगेगी?
नए चुने गए सदस्यों के लिए शपथ ग्रहण समारोह १० अप्रैल २०२६ को निर्धारित किया गया है। इस दिन नितिश कुमार और अन्य सांसदों को पदभार संभालना होगा।
बिहार में सरकार का नेतृत्व किसके हाथ में जाना चाहिए?
अभी तक किसी नए नाम की पुष्टि नहीं हुई है। अगर नितिश कुमार ६ महीने से ज्यादा नहीं रुकते, तो पार्टी के अन्य senior नेता जैसे सुरेन्द्र नाथ या अन्य को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
विजय कुमार चौधरी ने क्या भूमिका निभाई?
विजय कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे को लेकर पत्र विधान परिषद अध्यक्ष को सौंपा। वे जेडीयू के महत्वपूर्ण नेता हैं और मुख्यमंत्री के निकटस्थ माने जाते हैं।