जनवरी 20, 2026 को भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गईं — सोना पहली बार ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के बाध्यकारी स्तर को पार कर गया, जबकि चांदी ₹3 लाख प्रति किलोग्राम की दीवार तोड़कर ₹3.27 लाख तक पहुंच गई। ये उछाल केवल एक दिन की बात नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच तनाव के गहरे प्रभाव का प्रतिबिंब है। जब दुनिया अपने आर्थिक आधार को डर से देख रही है, तो निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित ठहराने के लिए प्राचीन सुरक्षा अस्त्र — सोना और चांदी — की ओर भाग रहे हैं।
सोने की तेजी: एक दिन में ₹17,000 का उछाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी डिलीवरी सोने की कीमत एक दिन में ₹4,300 बढ़कर ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई। अप्रैल 2026 के अग्रिम अनुबंध ने ₹1,53,858 प्रति 10 ग्राम का नया रिकॉर्ड बनाया। लेकिन ये केवल एक्सचेंज की बात नहीं — राज्य स्तर पर भी इसका असर दिखा। लखनऊ में 24 कैरेट सोना ₹1,50,630, मेरठ में ₹1,50,640 और वाराणसी में ₹1,48,520 प्रति 10 ग्राम पर बिका। ये सभी नए स्थानीय रिकॉर्ड हैं।
केवल 20 दिनों में, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹17,053 बढ़ चुकी है। 22 कैरेट सोना वाराणसी में ₹1,950 बढ़कर ₹1,36,150 पर पहुंचा, जबकि 18 कैरेट सोना ₹1,600 बढ़कर ₹1,11,430 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,670 प्रति ट्रॉय औंस पर टिका हुआ है — यह भी इतिहास के शीर्ष पर है।
चांदी का बिजली की तरह उछाल: ₹15,000 प्रति किलो एक दिन में
अगर सोना ने रिकॉर्ड तोड़े, तो चांदी ने बाजार को हिला दिया। MCX पर मार्च डिलीवरी चांदी ₹17,723 की छलांग लगाकर ₹3,27,998 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई — यह एक दिन में लगभग 6% की बढ़ोतरी है। अंदरूनी ट्रेडिंग में यह ₹3,22,000 तक चला, जबकि शाम तक ₹3,18,310 पर स्थिर हो गया।
ये कोई सामान्य उछाल नहीं है। जनवरी 19 को चांदी ₹3,10,275 पर बंद हुई थी — एक दिन में ₹15,000 का फर्क। दो दिनों में यह ₹32,187 बढ़ा, जो 11.18% की वृद्धि है। जनवरी 16 को यह केवल ₹2,87,762 था। यानी ₹2 लाख से ₹3 लाख तक पहुंचने में 14 महीने लगे, लेकिन ₹3 लाख से ₹3.27 लाख तक की छलांग सिर्फ 4 दिनों में हुई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर COMEX पर चांदी $94.74 प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गई — एक नया रिकॉर्ड।
क्यों ये उछाल? ट्रंप और यूरोप के बीच व्यापार युद्ध
इस बाजार के उतार-चढ़ाव का मूल कारण एक ज्योतिषीय तनाव है — अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय संघ के बीच। ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ के खतरे उठाए, जिसका तात्पर्य था ग्रीनलैंड खरीदने के उनके प्रस्ताव के खिलाफ यूरोप की आपत्ति। यह न केवल एक भू-राजनीतिक विवाद है, बल्कि एक आर्थिक शॉकवेव है।
प्रिथ्वी फिनमार्ट के विश्लेषक मनोज कुमार जैन ने Economic Times को बताया कि ये तनाव बाजार में जोखिम से बचने की भावना (risk-off sentiment) फैला रहा है। उनका कहना है कि चांदी के लिए $84 प्रति ट्रॉय औंस और सोने के लिए $4,440 प्रति ट्रॉय औंस समर्थन स्तर अभी भी मजबूत हैं।
स्थानीय व्यापारियों की आवाज: और बढ़ेगी कीमतें
वाराणसी सर्फ एसोसिएशन के सचिव रवि सर्राफ ने कहा, “हम देख रहे हैं कि ग्राहक अब सिर्फ शादी या उपहार के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए सोना खरीद रहे हैं। ये कोई अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि एक नए दौर की शुरुआत है।”
उनके अनुसार, जब तक अमेरिका और यूरोप के बीच टैरिफ युद्ध जारी रहेगा, तब तक सोना और चांदी की कीमतें ऊपर की ओर बढ़ती रहेंगी। वाराणसी के एक छोटे व्यापारी ने बताया, “पिछले साल जब हम ₹2.5 लाख प्रति किलो चांदी बेच रहे थे, तो लोग कहते थे — ये तो असंभव है। आज वे कह रहे हैं — क्या अगले हफ्ते ₹3.5 लाख हो जाएगा?”
क्या ये टिकेगा? विश्लेषकों की चेतावनी
ये उछाल टिकेगा या फिर तेजी से गिर जाएगा? यह अभी अनिश्चित है। लेकिन एक बात स्पष्ट है — बाजार अब पिछले नियमों के अनुसार नहीं चल रहा।
इस बार बाजार केवल भारतीय आपूर्ति-मांग के आधार पर नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के आधार पर हिल रहा है। यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक सहयोग में गिरावट, अमेरिका के निर्यात नीति में अचानक बदलाव, और यूरो के खिलाफ डॉलर की ताकत — ये सब एक साथ चल रहे हैं।
अगर यूरोप अपने व्यापारिक प्रतिक्रिया को तीव्र करता है, तो भारतीय बाजार और भी अधिक उतार-चढ़ाव का शिकार हो सकता है। लेकिन अगर तनाव शामिल हो जाता है, तो भी ये स्तर नीचे नहीं आएंगे — क्योंकि अब निवेशकों के लिए सोना और चांदी सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक आर्थिक शेल्टर बन चुके हैं।
अगला कदम क्या होगा?
अगले सप्ताह MCX पर अप्रैल सोना और अप्रैल चांदी के अग्रिम अनुबंधों की नीलामी होगी। यदि यूरोपीय देश ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ जवाबी प्रतिकार करते हैं, तो सोने की कीमत ₹1.6 लाख तक पहुंच सकती है।
सरकार भी इस पर नजर रख रही है। अगर आयात शुल्क में वृद्धि की जाती है, तो घरेलू बाजार में और दबाव पड़ सकता है। लेकिन अगर विदेशी निवेशक भारतीय सोने की ओर आकर्षित होते हैं, तो यह एक नया अवसर बन सकता है — भारत एक बड़ा सोना आयातक है, लेकिन अब यह एक बड़ा निवेश केंद्र भी बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोना और चांदी की कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही हैं?
इसका मुख्य कारण अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार तनाव है। डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ खतरों और ग्रीनलैंड खरीदने के प्रस्ताव के खिलाफ यूरोप की प्रतिक्रिया ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक इस स्थिति में सुरक्षित संपत्ति — सोना और चांदी — में अपनी पूंजी डाल रहे हैं, जिससे मांग बढ़ी है।
क्या ये कीमतें टिक सकती हैं?
अगर राजनीतिक तनाव बना रहता है, तो हां। मनोज कुमार जैन के अनुसार, सोने का समर्थन स्तर $4,440 प्रति ट्रॉय औंस और चांदी का $84 है। अगर ये स्तर टिक जाते हैं, तो कीमतें अभी भी ऊपर जा सकती हैं। लेकिन अगर संकट शामिल हो गया, तो तेजी से गिरावट भी संभव है।
सामान्य निवेशक को इस स्थिति में क्या करना चाहिए?
अगर आप पहले से सोना या चांदी में निवेश कर रहे हैं, तो बेचने की जल्दी न करें। ये उछाल आर्थिक अस्थिरता का परिणाम है, न कि बाजार का बुलबुला। अगर आप नए हैं, तो छोटे अंशों में निवेश करें — एक बार में बड़ी राशि न लगाएं। इनकी कीमतें अभी अत्यधिक अस्थिर हैं।
क्या भारत सरकार इस पर रोक लगाएगी?
सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है, लेकिन अगर आयात शुल्क में वृद्धि की जाती है, तो घरेलू कीमतें और बढ़ सकती हैं। लेकिन यह भी संभव है कि सरकार इनके आयात पर शुल्क कम करके बाजार को स्थिर करने की कोशिश करे — खासकर अगर निवेशक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार की ओर आकर्षित होने लगे।
चांदी क्यों सोने से ज्यादा तेजी से बढ़ रही है?
चांदी का बाजार छोटा है, इसलिए छोटी मांग में बदलाव भी बड़े उछाल का कारण बनता है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल डिमांड (इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनल) भी बढ़ रही है। जब निवेशक सोने की ओर भागते हैं, तो चांदी को भी उनकी निवेश रणनीति में शामिल कर लिया जाता है — यह एक अधिक लचीली और सस्ती विकल्प है।
इस उछाल का भारतीय आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह दोहरा प्रभाव डाल सकता है। एक ओर, आयात शुल्क बढ़ने से विदेशी विनिमय बाहर जा सकता है। दूसरी ओर, यदि भारत अपने सोने के भंडार को वैश्विक बाजार में बेचने लगे, तो यह एक नया आय का स्रोत बन सकता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा सोना आयातक है — अब यह एक निवेश केंद्र बन सकता है।